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स्मृति शेष : पिछड़े और गरीबो के मसीहा थे सहदेव बाबू,

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स्मृति शेष : पिछड़े और गरीबो के मसीहा थे सहदेव बाबू,

असरगंज। हरदिल अजीज सहदेव बिंद नहीं रहे, असरगंज में जिसने भी सुना अवाक रह गए। सहसा किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था। उम्र 74 की हो गयी थी ये दीगर बात है। नियमित दिनचर्या वाले पूर्ण स्वस्थ और हमेशा खुश रहने वाले सहदेव बिंद ऐसे कैसे जा सकते हैं। पारिवारिक और सामाजिक जीवन के रोल मॉडल सहदेव बिंद को केवल अपना मोहल्ला ही नहीं बल्कि मुंगेर के चार-पांच प्रखंडों के हजारों लोग उन्हें अपना भाई और चाचा ही मानते थे।सहदेव बिंद का निधन उनके निवास स्थान असरगंज जलालाबाद मुंगेर में हुआ। वे 74 वर्ष के थे। सामाजिक कार्यों से जुड़े सहदेव बिंद इनकी प्रारंभिक पढ़ाई असरगंज में हुई थी, तथा ग्रेजुएशन उन्होंने मुरारका कॉलेज सुलतानगंज से किया। वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे, पढ़ाई पूर्ण करने के बाद वयस्क शिक्षा विभाग बिहार में सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त हुए, मुख्यमंत्री लालू यादव प्रसाद कार्यकाल में वयस्क शिक्षा विभाग को रद्द कर दिया गया। बाद में पुनः कल्याण शाखा झारखंड में उनकी नियुक्ति हुई। वर्ष 2007 में अपनी सेवा से निवृत्त हुए ,सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा में लगे रहे, समाज से पिछड़े व्यक्ति के बीच उन्होंने सेतु का कार्य किया। किसी भी गरीब व्यक्ति के लिए उनका दरवाजा खुला रहता था, समाज में किसी प्रकार की मध्यस्था या सामाजिक कार्य के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। राजनीतिक में भी उनकी रूचि रही, पूर्व सांसद एवं तारापुर विधानसभा के पूर्व धाकड़ विधायक शकुनी चौधरी के करीबी रहे,आधी रात को भी किसी को कोई समस्या हो वे शहर का हो या बाहर का सहदेव बिंद हमेशा खड़े दिखते थे। कोई दबंग हो पैसे वाला, रिक्शा-ठेलेवाला और निर्धन मजदूर सभी उनकी की कद्र करते थे।असरगंज पंचायत के पूर्व प्रमुख दिनेश बिंद के चाचा थे, उन्होंने बताया कि सहदेव बाबू हमारे चाचा ही नहीं थे ,बल्कि हमारे राजनीतिक गुरु भी थे। हमारे राजनीतिक जीवन की शुरुआत में उनका अहम योगदान था। इनका दिशा निर्देश मिलता रहता था, तथा हर समाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे, उनके चले जाने से हम लोग अनाथ हो चुके हैं।असरगंज के पूर्व मुखिया राजेश बिंद के भी चाचा थे, उन्होंने भी बताया कि हमारे चाचा जी के मार्गदर्शन से मुखिया बना और असरगंज वासियों की सेवा की सहदेव प्रसाद काफी मिलनसार व्यक्ति थे। उनके संस्कारों का प्रभाव उनके दोनों पुत्र पर भी पड़ा है, बड़ा पुत्र राजकुमार शिक्षक है, द्वितीय पुत्र परमेश्वर कुमार उप निरीक्षक आरपीएफ के पद पर सिवान में पदस्थापित है। उनके पुत्र ने बताया पिताजी के चले जाने से हम लोग ही अनाथ नहीं हुए हैं, पूरा समाज अनाथ हो चुका है। असरगंज के बुद्धिजीवी में उनकी गिनती थी।सभी वर्गों के सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे पिताजी बचपन से ही सामाजिक व्यक्ति थे।सच में सहदेव बिंद जैसी शख्सियत हर रोज और हर कहीं पैदा नहीं होते हैं। उनका शरीर पंचतत्व में भले ही विलीन हो गया| लेकिन क्षेत्र के हजारों दिलों में वे लंबे समय तक जिंदा रहेंगे।इस कोरोना काल मे भी उनके अंतिम दर्शन मे 200 से ज्यादा लोग शामिल हुए । उनके अंतिम दर्शन मे असरगंज के डॉ महेंद्र मण्डल ,शिक्षक बासदेव प्रसाद ,परमानंद गुप्ता ,कोकाय साह,भास्कर मण्डल ,अधिवक्ता रवि सिंह ,बबलू साह ,सुबोध सिंह ,राकेश सिंह,संजीव झा,दारा सिंह इत्यादि लोग शामिल थे ।

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