झारखंड स्पेशल रिपोर्ट

सृजन संसार के साहित्यकारों ने दी विक्रमादित्य को भावभीनी श्रद्धांजलि, “सूरज को भी ग्रहण लग गया भरी दुपहरी अस्त हो गया…”

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“सूरज को भी ग्रहण लग गया भरी दुपहरी अस्त हो गया…”

सृजन संसार के साहित्यकारों ने दी विक्रमादित्य को भावभीनी श्रद्धांजलि,

सृजन संसार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आज ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से सेवानिवृत्त न्यायाधीश विक्रमादित्य को उनकी रचनाओं द्वारा साहित्यकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की । कार्यक्रम का संयोजन कवि एवं लोक गायक सदानंद सिंह यादव , मंच संचालन बिम्मी प्रसाद वीणा तथा अध्यक्षता मीनू मीना सिन्हा ‘मीनल’ ने की। कार्यक्रम की शुरुआत के पूर्व सभी साहित्यकारों ने 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया। उसके बाद डॉ सुरिंदर कौर नीलम ने -जब से खबर उड़ी है कि दिल,दिल नहीं रहा
इस दिल को अब किसी की नज़र कौन अब करे । डॉ राजश्री जयंती ने- लहर उठी है अभी जो दिल मे,
उसमें उड़ती पतंग तू है
इसकी खुशबू और रंग तू है । रेणु झा- ने मेरे आंगन में एक पेड़ था मोहब्बत का, जिसके साए में नींद बहुत अच्छी आती थी की प्रस्तुति दी। नंदनी प्रणय एवं मीनू मीना सिन्हा मीनल ने – सूरज को भी ग्रहण लग गया
भरी दुपहरी अस्त हो गया
लगता है यह साल पुराना जाएगा
कांप रहा है रह-रहकर यह
जैसे सन्निपात चढ़ा है की प्रस्तुति दी। वहीं विभा वर्मा ने -चल आज उजाला करते हैं
मेरे साथ तिमिर से लड़ते हैं । गीता चौबे गूंज ने अपनी प्रस्तुति में जाना मनोहर पोथी का वाचन किया।रूणा रश्मि दीप्त ने कुछ भी करो बुरा या अच्छा
थोड़ा तो हंगामा होगा।
कभी गिरोगे कभी उठोगे
कुछ खोना कुछ पाना होगा। कल्याणी झा कनक ने-
जजीरे जिंदगी से भागना दुश्वार है कितना
कभी किश्ती नहीं मिलती, कभी साहिल नहीं मिलता। स्नेहा राय ने- उनकी बातों से कई भरम टूटे हाथ जैसे कि इक नरम छूटे रजनी शर्मा चंदा ने -भी उनके रचना को पढ़ा। वरिष्ठ शायर निहाल हुसैन सरैयावी ने -जो भी आया है उसको जाना है,
सिलसिला ये बहुत पुराना है
ज़िन्दगी मौत की अमानत है
ये उसी का दिया खज़ाना है।
तुम्हारी याद को दिल से भुलाना मुश्किल है,
जहाँ गए हो वहाँ से बुलाना मुश्किल है। रंजना वर्मा उन्मुक्त ने- मेरे आँगन में एक पेड़ था मुहब्बत का,
जिसके साये में नींद बहुत आती थी।
वह पेड़ मेरे पुरखों ने लगाया था,
उसे मेरे माँ बाप चाचा चाचियों ने सींचा था। बिम्मी प्रसाद वीणा ने फैसला
कोर्ट कचहरी की अब जरूरत है क्या
नेताओं और पुलिस का हौसला बढ़ा दिया की प्रस्तुति दी वहीं सदानंद सिंह यादव ने – बहुत उदास सा लगता है, तेरे जाने से, लौट आओ मेरे हमदम किसी बहाने से की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गति दी । अंत में धन्यवाद ज्ञापन सदानंद सिंह यादव ने कर उन्हें पुनः नमन किए।

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