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“हिंदी का सम्मान देश का सम्मान” गोष्ठी का आयोजन,हिंदी विश्वव्यापी भाषा किसी मान्यता की मोहताज नहीं : आत्मीय,

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“हिंदी का सम्मान देश का सम्मान” गोष्ठी का आयोजन,हिंदी विश्वव्यापी भाषा किसी मान्यता की मोहताज नहीं : आत्मीय,
 मुंगेर।  जुनून के तत्वाधान में नगर के शादीपुर स्थित  पीसीएमबी क्लासेज के सभागार में “हिंदी का सम्मान देश का सम्मान” बिषय पर गोष्ठी का आयोजन गया।  अध्यक्षता करते हुए मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि हिंदी आजादी के पूर्व की अपेक्षा आज अधिक लोकप्रिय है। जब अंग्रेजी पत्रिकाएं 40% अधिक छपती थी, तब हिंदी दबी हुई थी पर आजादी के बाद धीरे-धीरे हिंदी अपने यौवन पर आने के बाद लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गई।

आज हिंदी किसी मान्यता की मोहताज नहीं है, क्योंकि तुलसीदास, प्रेमचंद्र, जयशंकर प्रसाद आदि ने अपनी कृतियों के माध्यम से इस भाषा को विश्वव्यापी आयाम दिया है। मुख्य अतिथि नगर निगम के प्रबंधक दीपक कुमार तिवारी ने कहा कि यूं तो विभिन्न राज्यों में मातृभाषा स्थायी रूप से स्थान बनाए हुए हैं, पर इन सब को जोड़ने का कार्य हिंदी कर रही है। पीसीएमबी क्लासेस के संस्थापक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि हिंदी को लोकप्रिय बनाने में अटल बिहारी बाजपेयी, स्वामी विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे लोगों का हाथ है। संगीता कुमारी ने कहा कि हिंदी सुग्राह्य होने के कारण लोकप्रिय होते जा रही है, कम पढ़े लिखे लोग भी सरलता हिंदी बोलने लगे हैं। विजय वर्तनिया  हिंदी को सरल एवं स्पष्ट भाषा होने के कारण देश के सभी राज्यों में मान्यता मिलने की बात कही है। चार्ली चैपलिन 2 हीरो राजन कुमार ने फिल्मों को हिंदी को लोकप्रिय बनाने में अग्रणी बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी का शुद्ध उच्चारण करने के लिए जगह-जगह पर कार्यशाला चलानी चाहिए। रेलकर्मी कवि प्रमोद निराला एक दोहे “अंग्रेजी बैसाखी की नहीं हिंदी करती है खुद के विकास … की बात सुनाते हुए हिंदी को राष्ट्र के सम्मान की भाषा बताया। मौके पर विमल कुमार मिश्रा, प्राचार्य अलग निरंजन कुशवाहा, आईटीसी कर्मी अजय कुमार सिन्हा, अमित कुमार नरेंद्र, तबला वादक किशोर कुणाल, अमित सहगल, नितिन सुकुमार, पीसीएमबी की निर्देशिका चंद्रमुखी, शिक्षिका आभा प्रियदर्शी, तेजस्विनी थे।

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