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रजोन एवं हैवतगंज प्रखंड से कालाजार उन्मूलन अभियान की हुई शुरुआत, छिड़काव के दौरान सिंथेटिक पाइराथाइराइड का किया जायेगा इस्तेमाल,

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रजोन एवं हैवतगंज प्रखंड से कालाजार उन्मूलन अभियान की हुई शुरुआत,

छिड़काव के दौरान सिंथेटिक पाइराथाइराइड का किया जायेगा इस्तेमाल,

लखीसराय।
जिले में कालाजार की रोकथाम के लिए अभियान की शुरूआत हो गयी है. इस अभियान को 60 कार्य दिवस तक चलाया जायेगा. कालाजार उन्मूलन के लिए इस सघन अभियान की शुरुआत जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र चौधरी ने सूर्यगढ़ा प्रखंड के हैवतगंज गाँव से की. यहां के 8 गांवों में कालाजार उन्मूलन के लिए यह अभियान चलाया जायेगा. इनमें मसुदन मुस्तफपुर, मानो, माहा हैवतगंज, वोलीपुर, रजोना गाँव वार्ड संख्या 1 व रेहूआ गांव शामिल हैं जो कालाजार से सबसे अधिक प्रभावित हैं. अभियान कार्य में छह सदस्यों वाली दो टीमों को लगाया गया है. यह टीम इन प्रभावित गांवों में जाकर छिड़काव का काम करेगी.

60 कार्यदिवस तक होंगे छिड़काव कार्य :-
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र चौधरी ने बताया कालाजार के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। प्रभावित गांवों में अगले 60 कार्यदिवस के दौरान कालाजार उन्मूलन का अभियान चलाया जाना है. इस दौरान गांव के हर एक घरों में छिड़काव किया जायेगा। स्वास्थ्यकर्मियों को सभी चिन्हित घरों में जाकर छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने लोगों को बीमारी के बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने देने की अपील की है. साथ ही यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालने और सोते समय मच्छरदानी लगा कर ही सोने की सलाह भी दी है. उन्होंने कहा बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छररोधी क्रीम का इस्तेमाल करें. कालाजार के खतरे को देखते हुए घरों की भीतरी दीवारों और गौशालाओं में कीटनाशक का छिड़काव करने व आस-पास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने के लिए भी कहा गया है. सभी आशाओं को अपने क्षेत्र में ऐसे किसी भी मरीज के होने और उसे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

कालाजार की कैसे करें पहचान :-
कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार हफ्ते से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं. कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल या पीएचसी भेजा जाना चाहिए.

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