जमुई

बिहार पुलिस की दबंगई: बीच सड़क पर स्कॉर्पियो लगाकर उलझे पत्रकारों से, सड़क पर दो पुलिसकर्मियों को आपस में उलझते देख पत्रकारों ने दोनों को समझाने की, की थी कोशिश, – अर्जुन अरनव की रिपोर्ट

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बिहार पुलिस की दबंगई: बीच सड़क पर स्कॉर्पियो लगाकर उलझे पत्रकारों से ,

सड़क पर दो पुलिसकर्मियों को आपस में उलझते देख पत्रकारों ने दोनों को समझाने की, की थी कोशिश,

जमुई।

जिले के महाराजगंज स्थित गांधी मार्केट पोस्ट ऑफिस रोड में शनिवार को उस वक्त अफरा तफरी मच गई जब , बीच सड़क पर सिविल ड्रेस में दो पुलिसकर्मी के बीच कहासुनी हो गई। बताते चलें कि पोस्ट ऑफिस की ओर से नगर थाना में कार्यरत एक पुलिसकर्मी अपने निजी काम से कार से कहीं जा रहे थे, सड़क जाम होने के कारण काफी मशक्कत के बाद वो जाम को हटाते हुए कुछ आगे बढ़े ही थे कि इतने में विपरीत दिशा से पुलिस लिखा हुआ बोर्ड वाला स्कॉर्पियो जिसका नम्बर WB-44 1668 बताया जा रहा है। जो बीच रोड में अपनी गाड़ी खड़ी कर पीछे हटने से साफ-साफ इनकार कर दिया काफी समझाने के बाद वो नहीं माना । सड़क पर दो पुलिसकर्मियों को आपस में उलझते देख स्थानीय लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो गई। इस बीच वहां पर उपस्थित कुछ पत्रकारों ने दोनों पुलिसकर्मी को पहले तो समझाया फिर नहीं मानने पर दोनों पुलिसकर्मियों की गाड़ी सहित वीडियो बनाने लगा। इतने में मलयपुर का रहने वाला सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी पत्रकारों को धमकाने लगा, और कहने लगा कि जाओ डीजीपी से शिकायत कर दो, मेरा कुछ नहीं होने वाला है। दरअसल, काफी खोजबीन करने के बाद पता चला कि उक्त पुलिसकर्मी जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित मलयपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला राजेश कुमार सिंह,जो फिलहाल पटना के किसी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थापित हैं। अपने आपको पुलिस बताने वाला पुलिसकर्मी राजेश कुमार सिंह वहां पर उपस्थित पत्रकारों से ना सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि पत्रकारों को धमकी भी दी। पत्रकारों से उलझने वाले तथाकथित पुलिसकर्मी पश्चिम बंगाल से रजिस्टर्ड गाड़ी का इस्तेमाल बिहार में कर रहे हैं, साथ ही उसपर अपने पद और विभाग का नेम प्लेट का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।
ऑफ ड्यूटी के दौरान पावर का बेजा इस्तेमाल :-

इस बीच कहासुनी होते देख वहां स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई । लेकिन सवाल सबसे बड़ा यह है कि जब एक पुलिसकर्मी पत्रकारों के साथ इस तरह से बदसलूकी कर सकता है, तो फिर आम इंसान के साथ कितनी बेरहमी से पेश आते होंगे। साथ ही ऑफ ड्यूटी आवर में एक पुलिस कर्मी का अपनी निजी काम में इस्तेमाल की गई गाड़ी पर पुलिस का नेम प्लेट लिखना कहां तक जायज है?

दूसरे राज्यों से कराया है वाहनों का रजिस्ट्रेशन :-

दो दिन पहले परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने मोटरवाहन अधिनियम को लेकर कई बड़ी बातों की घोषणा की है। उन्हें कहा है कि टैक्स चोरी के उद्देश्य से वाहन मालिक लक्जरी और अन्य वाहनों का रजिस्ट्रेशन झारखंड से कराते हैं और चोरी छुपे स्थायी तौर पर बिहार में परिचालन करते हैं। यह मोटरवाहन अधिनियम का उल्लंघन है। इससे बिहार को राजस्व क्षति भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग को सूचना मिली है कि झारखंड औऱ प.बंगाल के निबंधित वाहनों का अवैध परिचालन बिहार में धड़ल्ले से किया जा रहा है। यहां के स्थायी निवासी आस-पास के राज्यों में अवैध रूप से वाहनों का निबंधन करवा रहे हैं और बिहार में वाहनों का परिचालन कर रहे हैं। अब झारखंड या फिर प बंगाल में रजिस्ट्रेशन करा कर स्थायी रूप से बिहार में चलाने वाले वाहनों को अब बिहार का नंबर लेना होगा।
पुलिसकर्मी का वीवीआईपी कल्चर :-
जैसा की पहले भी माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीवीआईपी कल्चर छोड़ने की अपील भी कर चुके हैं, वहीं, इस बात पर कई लोगों ने अमल भी किया, लेकिन पुलिस महकमे में पद और विभाग का ऑफ ड्यूटी आवर में बेजा इस्तेमाल हो रहा है, जरूरी है कि ऐसे पुलिसकर्मी जो ऑफ ड्यूटी के समय अपने पद औऱ विभाग का दुरुपयोग कर रहे हैं, ऐसे में कैसे लोगों में पुलिस विभाग की ईमानदारी और स्वच्छ छवि वाली तस्वीर उभरकर सामने आएगी।

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