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अपर समाहर्ता ने किया अगहनी धान के फसल कटनी प्रयोग का किया निरीक्षण, 

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अपर समाहर्ता ने किया अगहनी धान के फसल कटनी प्रयोग का किया निरीक्षण, 

प्रति हेक्टेयर 31.64 क्विंटल उत्पादकता की गई आंकलित, 

अपर समाहर्ता ने किसानों से बीज के चयन, खाद के प्रयोग, सिंचाई सहित अन्य बिंदुओं पर फीडबैक प्राप्त किया, जैविक खेती को बढ़ावा देने की  कही बात,

मुंगेर ।

अपर समाहर्ता मुंगेर श्री मनोज कुमार ने जमालपुर प्रखंड के रामनगर ग्राम पंचायत के चंदनपुरा गांव में अगहनी धान के फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण किया। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, योजना एवं विकास विभाग, बिहार द्वारा बिहार राज्य फसल सहायता योजना अंतर्गत कृषि वर्ष 2023-24 के अधिसूचित एवं बीमित फसलों का फसल कटनी प्रयोग संपादित करवाया जा रहा है। जिला सांख्यिकी कार्यालय, मुंगेर द्वारा रामनगर पंचायत में अगहनी धान के कटनी प्रयोग के तहत प्राथमिक कार्यकर्ता श्री सुनील कुमार यादव, कृषि समन्वयक को यह प्रयोग आवंटित किया गया था, जिन्होंने इस फसल कटनी प्रयोग का संपादन अपर समाहर्ता सहित अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया। 

अपर समाहर्ता ने फसल कटनी प्रयोग के पूरी प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रत्येक चरण के बारे में प्रयोगकर्ता एवं जिला सांख्यिकी पदाधिकारी से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने धान में नमी की मात्रा एवं इसके सुखवन प्रयोग के संपादन के संबंध में भी जानकारी ली। अपर समाहर्ता ने बताया कि उन्होंने  अन्य जिलों में भी फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण किया है।

विदित हो कि भदई मक्का, गन्ना और अगहनी धान के साथ रब्बी गेहूं और मकई का भी पंचायत स्तरीय फसल कटनी आयोजित किया जाता है, जिसके तहत प्रत्येक पंचायत में 5 फसल कटनी प्रयोग संपादित किया जाता है। फसल कटनी प्रयोग से एक ओर जहां फसलों की उत्पादकता ज्ञात होती है, वहीं दूसरी ओर इसके आधार पर अधिसूचित एवं बीमित फसलों हेतु फसल क्षतिपूर्ति का निर्धारण सहकारिता विभाग, बिहार द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा इसके आंकड़ों का प्रयोग कृषि संबंधित नीतियों को तय करने में भी किया जाता है। फसल कटनी प्रयोग से प्राप्त उपज दर से राज्य आय में कृषि के हिस्से का भी पता चलता है। 

फसल कटनी प्रयोग उपज दर के अनुमान लगाने की एक वैज्ञानिक पद्धति है तथा कटनी प्रयोग का विधिवत किया जाना शुद्ध शुद्ध उत्पादकता के अनुमान लगाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए फसल कटनी प्रयोगों की विभिन्न प्रक्रियाओं का निरीक्षण  जिला स्तरीय, अनुमंडल स्तरीय एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों द्वारा किया जाता है। जिला पदाधिकारी ने इसी क्रम में जानकीनगर ग्राम पंचायत में फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण किया। 

 फसल कटनी प्रयोग के लिए खसरा/कीता संख्या 305 पर स्थित रामनगर पंचायत के चंदनपुरा ग्राम के किसान श्री लाल तांती के खेत का चयन किया गया था। फसल कटनी प्रयोग के दौरान रैंडम तालिका के आधार पर खेत में 10 मीटर लंबाई एवं 5 मीटर चौड़ाई के आयताकार खंड को चिन्हित कर उक्त खंड की सीमा पर या उसके अंदर पड़ने वाले अगहनी धान की फसल की कटनी कराई गई। 

अपर समाहर्ता ने स्वयं अपने हाथों में हंसुआ पकड़कर फसल काटना प्रारंभ किया। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी,  प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अन्य प्रखंड विकास पदाधिकारी ने भी हंसुआ से फसल को काटा और तत्पश्चात मजदूरों द्वारा चिन्हित क्षेत्र के अंदर स्थित फसल की कटनी की गई। कटनी प्रयोग का जीपीएस फोटो एवं डाटा सीसीई ऐप पर अपलोड किया गया। विदित हो कि प्रत्येक फसल कटनी प्रयोग का फोटो एवं डाटा क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट ऐप पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है, जिसमें खेत का जीपीएस लोकेशन भी दर्ज होता है। 

इस दौरान फसल कटनी प्रयोग के महत्व एवं इसकी प्रक्रिया की जानकारी जिला सांख्यिकी पदाधिकारी द्वारा अपर समाहर्ता एवं उपस्थित किसानों को दी गई। अपर समाहर्ता द्वारा धान के प्रभेद के संबंध में किसान से जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने श्री विधि एवं अन्य आधुनिक विधियों से खेती करने की सलाह किसानों को दी। उन्होंने किसानों को जैविक खेती करने का भी निर्देश दिया। 

फसल कटनी के बाद पिटनी एवं दौनी का कार्य किया गया, जिससे प्राप्त धान के दाने की तौल की गई। 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में कटनी किए गए धान के दाने का वजन इलेक्ट्रॉनिक तराजू पर 15.730 किलोग्राम मापा गया। धान के हरे दाने को अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय से प्राप्त विशेष बोरे में सीलबंद किया गया और इसे 15 दिनों तक धूप में सुखाकर सुखवन प्रयोग किया जाएगा और सुखे दाने का वजन दर्ज किया जाएगा। 

प्राप्त उपज के आधार पर प्रति हेक्टेयर धान की उत्पादकता 31.46 क्विंटल आंकी गई, जिसे सामान्य उत्पादकता माना जा सकता है। किसान ने बताया कि खेत में घरेलू उपभोग का अवशिष्ट पानी जमा था, जिसकी वजह से उत्पादन थोड़ा प्रभावित हुआ है। इस पंचायत में धान की खेती कम ही होती है। स्थानीय किसानों ने बताया कि इस वर्ष जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में अच्छी वर्षा होने की वजह से फसल अच्छी है। खेत में पानी लगे रहने की वजह से उपज थोड़ा प्रभावित हुआ है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में फसल अच्छी है।

अपर समाहर्ता द्वारा फसल कटनी प्रयोग के निरीक्षण के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री आनंद प्रकाश, प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री नंदकिशोर, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी श्री राम प्रवेश, कृषि समन्वयक श्री सुनील कुमार यादव, किसान सलाहकार श्री पुटुक लाल पासवान एवं पंचायत के स्थानीय किसान भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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